हमारे देश मे पानी काफी अहम मुद्दों मे से एक है मगर ऐसा कम देखा गया है की किसी नेता ने इसह मुद्दे को संसद मे उठा पाने की जमायत की हो..
सबसे पहेली तस्वीर अगर हम आप को दिखाना चाहे तो पहेले कुछ इस तरह से उभर कर सामने आती है ......
सरकार दावा करती है की ग्लासिएर बिलकुल सुरशित है ,मगर एक तस्वीर आप को सीदा दिखा थे जो दिल्ली की है जी हाँ सीदा राजधानी से जहाँ एक आम आदमी पानी के लिए कितना कितना सुरशित है.....
जब राजधानी का यह हाल है तो सोच लेना ही काफी होगा की पुरे देश मे क्या हाल होगा.....
मगर यह मुद्दा इतना अहम नहीं है,जितना की संसद को रोज भंग करना ,या सीदा मे कहे तो रुकावट पैदा करना पर भला कोई कर भी क्या सकता है...हमारा काम तो बस वोट डालनी तक ही सीमित रहे गया है.....
अब आप को एक तस्वीर और दिखा जाते है ,जाते जाते मगर जरा ध्यान से और समाज को अब समज लेने की जरुरत है की अभी भी बाजी वोटर के हाथ मे ही है बस मौका मिलने के देरी है......
तो सोचना होगा की अब करना क्या है ........
अगर साइडइफेक्ट देखे जाये तो बोहोत होते है मगर यहाँ मामला जरा राजनीती के स्तर उपर उत्ता ने का है ... जिस के कल्पना भी नहीं की जा सकती आज राजनीती उस स्तर तक चले गयी है...
बिलकुल कफ़ी आज़मी की कुछ पंतियो के साथ अब हम विदा लेते है.....
बस्ती जो अपनी हिन्दू मुसलमान जो बस गए ......
इंसान की तस्वीर देखेने को हम तरश गए....
कफ़ी आज़मी
अगर साइडइफेक्ट देखे जाये तो बोहोत होते है मगर यहाँ मामला जरा राजनीती के स्तर उपर उत्ता ने का है ... जिस के कल्पना भी नहीं की जा सकती आज राजनीती उस स्तर तक चले गयी है...
बिलकुल कफ़ी आज़मी की कुछ पंतियो के साथ अब हम विदा लेते है.....
बस्ती जो अपनी हिन्दू मुसलमान जो बस गए ......
इंसान की तस्वीर देखेने को हम तरश गए....
कफ़ी आज़मी





