"THINK RICH LOOK POOR"

Thought of the day....

Things that are done,it is needless to speak about: Things that are past it is needless to blame.....
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Friday, May 14, 2010

यहाँ जवान का माकन हों यह मेरा मेरा माकन

यहाँ जवान का माकन हों यह मेरा मेरा माकन ,
किसी को परवा नहीं ,ऐसा हों गया है जहान......

रोहित ध्यानी. 

यह हमारा २१ सदी का दुर्भय कहे या हमारी नासमज तो इस बात से मुझे बिल कूल भी ऐतराज़ ना होगा बल्कि अगर आप ऐसा सोचे तो मुझे बेहद खुसी होगी कम से कम आप ने सोचा तो सही .....

दरसल बात स्रिफ इतनी सी  फ़िक्र की  है की हम लोगो के पास बिलकुल भी वक़्त नहीं है उन जवानों को देनो को जिस जवान ने अपनी बेहद कीमती जान दी है स्रिफ हम लोग को जीवन दान दान देने के लिए .........

हाँ मुझ को तो बिलकूल भी वक़्त नहीं है उन जवानों के घर जाने के लिए क्युकी यहाँ अपनी भी तो जिंदगी जीनी है ,
मगर मुझे बेहद अफोश है इस बात का की  मै वहां जाने मै आसमत हू जहान मुझे जाना था ...

यह वक़्त हे ऐसा है की हम बोहोत जल्दी हर बात को भूल जाते है और मशरूफ हों जाते है अपनी जिंदगी जीने मै खास्स्कर मै .....
मगर अक्सर यह ख्याल आता है , की जिन जवानों ने मेरे लिए अपनी जान कुर्बान की है मैंने उस के लिए क्या किया है , नाही  सरकार ने कुछ किया होगा वोह तो बस किताबी बाते है की एलान कर दिया जाता है की हर जवान को फेलाना रकम दी जाएगी ,
मगर मै भले भाती जानता हू किस को क्या मिलता है , जनाब आप कैसे भूल सकते २६/११ (26/11) का वो मुद्दा जो आज भी ताजा है,मगर हमको पता यह सरकारी दुनिया कितनी और कैसे चलती है....

जैसे 76 सीआरपीएफ जवान माओवादियों के बारुदी सुरंग की चपेट में आकर सवा महीने पहले शहीद हुये थे,
वैसे ही कहीं उनकी जीवन भर की फाइल कहीं दबा दी होगी इन सरकारी करमचारियो ने भला यह भी क्यूँ सरदर्दी पाले मुद्दा कभी कुछ बोलते है,और जो जवान यह सोच कर अपने प्राण देता है की अपने देश को बचा कर जा रहा हू सो उस को एक बात  सोच लेनी होगी की अगर ऐसा सरकारी काम चलता रहा तो एक दिन इस देश के सेना को जवानों की कमी ना पड जाये .....

माओवादियों से मुझे कोई गिला नहीं है जो उन की मांगे है उन पर सरकार विचार भी कर सकती है मगर मेरे पास ऐसी कोई गारंटी भी नहीं है की उन के आर्मसमर्पण करने से सरकार उनका साथ देगी भी या स्रिफ अपना भोलाभाला जवाब देगी की अभी टाइम लगेगा और इतने मै कितनो की जिंदगी क्या से क्या हों जाएगी ....


अब समय आ गया की हम लोगो को फ़ौरन कदम लेना होगा,चाहे वो किसी के हक मे भी हों ......



कहीं ऐसा ना हों की समय हम को कहीं दूर छोड़ जाये और हम लोग कहीं माओवादियों से युद कर कर अपने जवान खोते रहे..

Thursday, May 13, 2010

कुछ भी हो यह सबसे बड़ा लोकतन्त है .

                                             

अभी हाल का मुद्दा ले लियिजे बीजेपी के एक नेता जी ने कुछ ऐसे टिपणी की आचानक से देश की राजनीती मे इतनी तेजी आ गयी जैसे किसी नेता ने संसद मे गरीब की आवाज बुलंद कर दी हो,मुझे कुछ समझ मै नहीं आया की आचानक से इतना जोश दिखा पटना की सडको मै जैसे हर कोई आदमी एक ऐसा मुद्दा ढूंड रहा हो जिस से वह दूर तक ले जाये,भला वह अपने मुद्दों के क्यूँ नहीं  इतना जोशशोर से  दिखा सकते मगर यह लोकतन्त देश है यहाँ ऐसे ही मुद्दो की तलाश रहेती है.

मुझे आज भी याद वोह दिन जब एक कवी ने यह बात भी कही थी.....

बस अब गरीबी जाने वाली ही है देश से ,
यह सुनते सुनते उम्र के ७० बरस गए....

       कैफ़ी आज़मी


जी हाँ यह वही कवी है जिन को आप कैफ़ी आज़मी  के नाम से जानते है,आज की राजनीति एक ऐसे मोड़ मै आ कर रूक   गयी  , जहाँ बस एक ही काम रहे जाता है वह है एक दुरसे के उपर आरोप पात्यारोप लगाना,क्यों नहीं अगर कोई नेता किसी पर दो टूक बोलता है थो उस को मीडिया उजागार भी करती है और हमारे नेता जी को कैमरा मै आने का एक बेतरीन मौका मिलता है.....
जिस को बोहोत ही आराम से पा भी लेते है....
क्यूकि यह संसार का सबसे बड़ा लोक्तानिक देश है तो यहाँ के नेता भी काम करते होगे, मगर यहाँ आ कर  तस्वीर बिलकुल उलट जाती है,आज भी देश के कही जगह ऐसी है जहाँ हर दिन १०० किस्सान आम्ताम्हात्य कर रहा  है,मगर उस की आवाज़ कम ही कोई बुलंद करता हो ऐसा मैंने भी देखा है ,हाँ अगर मसला "IPL " तो बात अलग है,जब तो यह मुद्दा संसद मे बोहोत जोरशोर से सुने मे आ सकता है ,दरअसल मीडिया इस को तवोज नहीं देती,एक और बात है की ऐसे मौका मीडिया को मिलता भी नहीं है क्यूकि कोई नेता ऐसा कुछ हाल के दिनों मै कर भी नहीं पाता है, यह मेरे लिए तो सपन जैसा होगा जब जेपी जैसे नेता दुबारा उभर कर इस मुल्क मै आयेंगे .....

मगर मै अगर कहू की एक इंसान ऐसा भी है जो मीडिया के डंके की चोट मै सच दिखा जाता  है सो मेरा यह नाम लेना बिलकुल भी गलत नहीं होगा वह है श्री  पुण्य प्रसून बाजपेयी जी .....

श्री  पुण्य प्रसून बाजपेयी जी  अपने १९ मिनट के बड़ी बात के कार्यकर्म  मे यह जनाब हर बात को इतनी आसनी से कह जाते है जैसे यह सब जानते हो की देश मै कहाँ तस्वीर गलत है और कहाँ सही....